सलवा-जुडूम

 बस्तर के आदिजनों का स्वः स्फूर्त सत्याग्रह

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 ।।बयान।।

 

 नक्सलियों का मनोबल टूटेगाःगृहमंत्री रामविचार नेताम

 

रायपुर। आंध्रप्रदेश में नक्सलियों के परिवारजनों द्वारा जुलूस निकालकर की गई घर वापसी की मार्मिक अपील को छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामविचार नेतामने इसे राज्य में चल रहे सलवा जुडूम का ही स्वरूप बताते हुए दावा किया है कि इससे नक्सलियों का मनोबल टूटेगा और वह मुख्यधारा में लौटने को मजबूर होंगे। गृहमंत्री ने आज यहां एक पत्रवार्ता में कहा कि एक वर्ष पूर्व राज्य में नक्सलियों के खिलाफ शुरू हुए जनांदोलन का विस्तार पड़ोसी राज्यों में भी होना छत्तीसगढ़ के लिए जहां एक बड़ी उपलब्धि है वहीं उन लोगों को भी जवाब मिला है जो कि राज्य में चल रहे जनांदोलन को बंद करने के लिए मुहिम चला रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि दो पड़ोसी राज्यों झरखंड और आंध्रप्रदेश में जनआंदोलन का विस्तार छत्तीसगढ़ के लिए भी दूरगामी प्रभाव होगा। इन राज्यों के बड़े नक्सली राज्य के सरगुजा एवं बस्तर क्षेत्रों में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में कुछ स्थानों पर नक्सलियों के खिलाफ लोगों ने आंदोलन शुरू ही किया था कि आंध्र में भी लोगों का सड़क पर उतरना एक तरह से छत्तीसगढ़ की जीत है।

 

उल्लेखनीय है कि आंध्रप्रदेश नक्सल प्रभावित वारंगल जिले में गत 15 जून को 22 गांवों के लगभग 15 हजार से अधिक लोगों ने जुलूस निकाल तथा बैनर तख्तियों पर लिखे मार्मिक नारों के जरिये नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की। इन लोगों में बड़ी संख्या में वह लोग शामिल थे जिनके परिवार के लोग नक्सली है और आंध्र के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी वह सक्रिय है। श्री नेताम ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ जनआंदोलन के हुए विस्तार के बाद राज्य सरकार आंध्र प्रदेश एवं झारखण्ड सरकारों तथा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे लोगों से बेहतर संबंध एवं समन्वय रखने का पूरा प्रयास होगा। छत्तीसगढ़ इन राज्यों में नक्सलियों के खिलाफ में शुरू जनआंदोलन को क्या मदद देगा यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पूरा नैतिक समर्थन दिया जाएगा।

 

आंध्रप्रदेश में वारंगल में घर वापसी के आंदोलन का जिक्र करते हु श्री नताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़े आंध्र के इस क्षेत्र में लोगों के बीच रोटी-बेटी का सं्बंध है और जिस तरह से नक्सलियों के परिवारजनों ने सड़क पर उतरकर रास्ते से भटक चुके अपने बच्चों से घर वापसी की मार्मिक अपील की है निश्चित रूप से इसका लाभ दोनों ही राज्यों को मिलेगा।

 

छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम आंदोलन के एक वर्ष पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस अभियान के शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में जहां नक्सलियों के हौसले पस्त हुए हैं और बड़ी संख्या में संगम सदस्यों के समर्पण से उनका नेटवर्क कमजोर हुआ है, वहीं पर पुलिस के प्रति वहां के लोगों में धारणा भी बदली है। कभी पुलिस से असहयोग करने वाले इस क्षेत्र के लोग अब पुलिस को सूचना भी देने में लगे हैं जो कि बड़ी उपलब्धि है।

 

उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम आंदोलन शुरू होने के बाद राज्य में अब तक 214 आम लोग तथा 80 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं उन्होंने कहा कि इस समय 27 राहत शिविर में 46 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं। उन्होंने सलवा जुडूम अभियान को बंद करन ेकी मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसका सवाल ही पैदा नहीं होता।

 

श्री नेताम ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस कर्मियों के रिक्त पदों पर भर्ती के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इस वर्ष छह हजार पुलिस कर्मियों की भर्ती की जाएगी तथा सशस्त्र बल की दो बटालियनों का भी गठन किया जाएगा, इसमें से एक के लिए प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

 

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के रिक्त पदों के भरने के बाद नक्सल क्षेत्रों में और नए थाने एवं चौकियां खोलने का प्रस्ताव है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन क्षेत्रों में स्थानांतरित किए गए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्थानांतरण रुकवा लिए हैं उन्होंने कहा कि स्थानांतरण केवल स्वास्थ्य कारणों से ही रोके गए हैं।

(दैनिक हरिभूमि, रायपुर - 22 जून 2006 )

 

संपर्कः लोकमान्य सद्भावना समिति, जैनबाड़ा, बैजनाथ पारा, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत-492001

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