सलवा-जुडूम

 बस्तर के आदिजनों का स्वः स्फूर्त सत्याग्रह

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 ।।बयान।।

 

 जंगल की आग में लड़ने वाले झुलस जाएंगे - श्री रमन सिंह

 

माओवादी आतंकवादी पर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा बस्तर में शुरू हुआ सलवा जुडूम आंदोलन जंगल की आग जैसा है। उन्होंने कहा 'इस आग से जो भी लड़ने की कोशिश करेगा, झुलस कर मर जाएगा। जंगल की आग तभी बूझती है जब तक बारिश होती और उसके बाद नयी कोपलें फूटती हैं।'

 

स्वयं सेवी संस्था कनफ्लीक्ट प्रबंधन संस्थान द्वारा माओवादी पर आयोजित सेमीनार का उद्धाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने ये बातें कहीं। डॉ. रमन सिंह ने कहा लोग यह जानना चाहते हैं कि नक्सलियों के पास हथियार और पैसा कहां से आ रहा है। उन्होंने कहा सलवा जुडूम आंदोलन दुनियाभर के लिए एक टर्निंग प्वाइंट है। यह 5 जून 2005 को शुरू हुआ और यह तारीख इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख होगी। इस आंदोलन की शुरुआत उन आदिवासियों ने की, जिन तक न तो अखबार पहुंचते हैं और न ही टेलीविजन। गोले-बारूद से लैस नक्सलियों के खिलाफ आदिवासी तीर कमान लेकर खड़े हो गए हैं। यह एक अहिंसक आंदोलन है। लोगों को यह गलतफहमी है कि यह आंदोलन कांग्रेस या भाजपा के बूते चल रहा है। किसी भी राजनीतिक दल की ऐसी ताकत नहीं तो ऐसा आंदोलन खड़ा कर सकें। ऐसे आंदोलन के लिए दिलों में आग चाहिए होती है, तभी लोग अपनी जान न्योछावर करने के लिए तैयार होते हैं।

 

उन्होंने कहा- 'बस्तर में गांधी जिंदा है, अहिंसक आंदोलन और असहयोग आंदोलन जिंदा है, अहिंसक आंदोलन और सहयोग आंदोलन जिंदा है। मैं इन आंदोलनकारियों की तुलना उन स्वतंत्रता सेनानियों से करना चाहूंगा, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लोकतंत्र की स्थापना के लिए लड़ाई लड़ी थी। सलवा जुडूम आंदोलन असफल नहीं हो सकता। चाहे डॉ. रमन रहे न रहे, कर्मा रहे न रहे, रामविचार नेताम रहे न रहे।' मुख्यमंत्री ने कहा- लोग हमसे पूछते हैं कि नक्सलवाद के खिलाफ आपकी रणनीति क्या है। जब एमसीस और पिपुल्सवार ग्रुप एक हो सकते हैं तो फिर हम सब एक होकर लड़ाई क्यों नहीं लड़ सकते। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वह हाथी है जिसके पूंछ और पैर को टटोलकर इसके आकार प्रकार का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। देश में जो रेड कॉरीडोर है, उसके ब्रेकिंग प्वाइंट कौन-कौन से होंगे यह तय किए जाने की आवश्यकता है। इस रणनीति में हमें हमारी भूमिका बता दी जानी चाहिए। हमें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी उसे निभाने के लिए किसी भी स्तर पर कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।

 

पत्रकारों के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में लोग इसलिए बड़े पैमाने पर हताहत हो रहे हैं क्योंकि नक्सलवादी हर मोर्चे पर घिर चुके हैं। नक्सली हमलों में मारे गए लोगों की संख्या जादा है। उन्होंने कहा जब तक बस्तर के लोग उनके लिए बारूदी सुरंगे बिछा रहे थे तब तो दोस्त थे और जब उन्होंने उनसे बस्तर छोड़ने कहा तो दुश्मन हो गए। 79 आदिवासियों के आत्मसमर्पण के मामले में उनका कहना था कि पुलिस को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बच्चों से एसपीओ के रूप में कार्य लिए जाने संबंधी शिकायतों को गलत बताते हुए उन्होंने कहा आदिवासियों की कम कद-काठी की वजह से ऐसा लग सकता है। एसपीओ की भरती नियम-कायदों के तहत ही की जा रही है। नक्सली बच्चों को वर्दी पहनाकर लड़ाई में धकेल रहे हैं, उन्हें बाल संघम सदस्य बना रहे हैं। ऐसे सवाल उनसे तो कोई नहीं पूछता।

 

संपर्कः लोकमान्य सद्भावना समिति, जैनबाड़ा, बैजनाथ पारा, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत-492001

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